Kalam Ki Awaaz Se.....

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shalinisharma


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यूवाओ के लिए अवसर ………………..

Posted On: 2 Jan, 2012  
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यूवाओ के लिए अवसर

Posted On: 2 Jan, 2012  
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आज़ादी क्या है….

Posted On: 19 Dec, 2011  
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आज़ादी क्या है….

Posted On: 19 Dec, 2011  
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मिलन की रात……

Posted On: 8 Nov, 2011  
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मिलन की रात……

Posted On: 8 Nov, 2011  
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Posted On: 17 Oct, 2011  
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एक लड़का जाने क्यूँ ……………..

Posted On: 17 Oct, 2011  
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दो दोस्तों की अनमोल कहानी……………

Posted On: 14 Oct, 2011  
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Posted On: 14 Oct, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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दूरी का कारण है और वो है भय. एड्स की बिमारी को कुछ लोगो ने अपने स्वार्थ साधने मात्र के लिए होवा बना दिया है. जैसे कुछ वर्षो पहले जब एड्स की बिमारी सुनने में भी नहीं थी तब लोग कैंसर की बीमारी को सबसे अधिक भय जनक मानते थे. जो अब भी है किन्तु किसी भी समस्या से भय्बित होकर कोई लाभ नहीं अपितु हानि ही हानि है. कई लोग तो अनावश्यक रूप से ही जिन्हें कोई बेमारी भी नहीं है वह भी इससे डर में ही जीते है की कही उन्हें भी यह न हो जाए. इसी भय को कुछ लोग भुनाने में लगे है. अरबो खरबों का खेल खेला जाता है, इससे बचने की सुरक्षा उपकरणों में. और लोग भी किसी अनजान भय वश अज्ञानता के कारण उसका शिकार भी बनते है. http://singh.jagranjunction.com/2012/01/21/%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A3-%E0%A4%B9/

के द्वारा: Amar Singh Amar Singh

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मैंने किसी शहर के बार मे बुराई नहीं की है ये तो बस एक कविता है ,,,और रही बात पांच बजे सुबह उठने का वो तो सभी को उठना चाहिए क्यूंकि सुबह की जो किरण होती है वो शायद ८ बजे के उठने में ना हो और मेरे इस कविताकविता का ये मतलब नहीं था की मैंने किसी प्रान्त की या फिर किसी इंसान की जो सुबह पांच बजे नहीं नह उठते है उनकी बुराई की है ये तो सिर्फ एक कविता है मैंने राजनीती नहीं की और ना मैं करना चाहती हो और वैसे एक कविता को दिल से इतना नहीं लगाना चाहिए की वो राजनीती बन जाये ये कविता के काल्पनिक है किसी व्यति विशेष के बारे में नहीं है और ना ही किसी प्रान्त के बारे में वैसे दुनिया में समुन्द्र के किनारे कई शहर है.....और अगर आप लोगो को मेरे इस कविता से बुरा हो तो मुझे माफ़ कीजये ............

के द्वारा:

शालिनी जी नमस्कार ,मैंने पहली बार आपका लेख पढ़ा मेरे विचार में सर्कार में इच्छाशक्ति की कमी हैं .संसद पर हमले के आरोपी और अघोषित युद्ध जिसे हमारे वीर- जवानों ने अपने जान की बाजी लगाकर लड़ा था के आरोपी को फांसी पर आज तक नहीं लटकाया गया .मैं मानता हूँ की भारत में अपराधी को भी अपनी बात रखने की पुरु आजादी हैं चाहे कैसा भी अपराधी हो लेकिन क्या उन लोगो को छोड़ दिया जाना चाहिए जिन्होंने किसी मां से उसका बेटा किसी बहन से उसका भाई ,किसी पत्नी से उसका पति ,किसी वाप से उसका बेटा छीन लिया हो ,जबकि उसे सर्वोच्य न्यायलय ने भी दोषी ठहराते हुए फासी की सजा सुनाई हो .अच्छी रचना . यदि कभी फुर्सत मिले तो मुझे FOLLOW करे . अमित कुमार गुप्ता हाजीपुर वैशाली बिहार www.amitkrgupta.jagranjunction.com

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के द्वारा: shalinisharma shalinisharma




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