Kalam Ki Awaaz Se.....

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राजकुमारी सायेली…

Posted On: 11 Jun, 2012 Others में

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.………………..मगद के सुन्दर नगर में खुशहाली की कोई कमी नहीं थी इस नगर के राजा उदयवीर और अपनी पत्नी यसोधरा और अपने एक पुत्र के साथ रहते थे , जिसका नाम राजकुमार आदित्य था , वह अपने पिता के साथ अपने राज्य के सारे कामो में मदद करवाता था और प्रजा राजकुमार आदित्य को बहुत मानती थी |

–लेकिन राजा उदयवीर को एक ही चिंता थी वो ये की उसके पुत्र का विवाह एक सच्ची राजकुमारी से हो लेकिन ये शायद राजा और उसके पुत्र के लिए दुर्भाग्य था की उन्हें अपनी पसंद की लडकी नहीं मिल रही थी राजकुमार अपनी पसंद की लडकी और एक सच्ची राजकुमारी खोजता है लेकिन उससे अपनी ख्वाबो की राजकुमारी नहीं मिलती है ….वक़्त ऐसे बीतता रहता है एक दिन अचानक तेज बारिश के बीच में एक लडकी महल के दरवाज़े पर आ खड़ी हो जाती है वो बारिश में आधी रात तक भीगती रहती है जब सुबह होती है तब महल के दरबारी दरवाज़ा खोलते है तो डर जाते है क्यूंकि वो लडकी बहुत ही नाजुक हालत में पड़ी रहती है…..तब तक महल की कुछ औरते उसे महल के अन्दर ले आती है और इसकी खबर महारानी को दिया जाता है ……..इतना खबर सुनते ही महारानी जल्दी आती है और उसे अन्दर ले जाती है वो बहुत गीली और बीमार दिखती है इसीलिए महारानी उसे कुछ कपडे देती और कुछ ओषधि देती है | ..

थोड़ी देर आराम करने के बाद महारानी उसके पास आती है और उससे उसके बारे में पूछती है…

महारानी– तुम कौन हो और इतनी रात को महल में कैसे आ गयी थी और तुम्हारा नाम क्या है..
लड़की— महारानी जी पहले तो मैं आपका शुक्रिया अदा करना चाहती हो क्यूंकि आपने मुझे अपने महल में रहने के लिए जगह दी जी मेरा नाम निवेदिता है और मैं यही पास के गाव में रहती हो….
महारानी – कौन से गाव
निवेदिता- रामपुर
महारानी अच्छा तो तुम रामपुर गाव की हो पर मैं क्या एक बात पूछ सकती हो
सयाली जी पूछिए
महारानी तुम इतनी रात को गाव से क्यों आई कुछ हुआ है तुम्हारे साथ |

….महारानी के इतना पूछने पर सायेली के आँखों में आंसू आने लगता है और उसके आंसू को देखकर महारानी अपनी बात को नहीं पूछती है और वो उससे कहती है “ठीक है तुम जितने दिन चाहो यहाँ रह सकती हो “|

निवेदिता -महारानी जी मैं ज्यादा दिन यहाँ नहीं रहोगी बस कुछ दिन के लिए जब सब कुछ ठीक हो जायेंगा तो मैं खुद यहाँ से चली जाओगी |
महारानी ठीक है मैं ये बात राजा जी से कह दोंगी |

…………………निवेदिता का महल में रहना राजकुमार आदित्य को बिलकुल नहीं पसंद था क्यूंकि वो उसे जासूस समझता था और चाहता था की वो महल छोडकर चली जाये लेकिन …….निवेदिता को गलत साबित करने के लिए उसके पास कोई सबूत नहीं था…..क्यूंकि निवेदिता कभी भी कोई गलत काम नहीं करती थी…….दिन बीतते गये और आदित्य और निवेदिता की दूरिय भी मिटने लगी और धीरे धीरे निवेदिता राजकुमार आदित्य को पसंद करने लगी थी ….लेकिन आदित्य उसको सिर्फ अपना दोस्त ही मानता था |

………………………..एक दिन रात को महल से बाहर निवेदिता को किसी अनजान इंसान से बात करते आदित्य देख लेता है……देखने के बाद आदित्य निवेदिता से कुछ नहीं बोलता है ……लेकिन धीरे धीरे निवेदिता के आदत में परिवर्तन आता देख सब उस पर शक करने लगते है और महल में बहुत दिन तक रहने पर एक दिन आदित्य उससे पूछता है |

आदित्य – तुम हो कौन और इतनी दिनों से महल में क्या कर रही हो…तुम्हारे माँ बाप कौन है |
…………………….निवेदिता थोड़ी देर तक चुप रहती है

उसकी चुप्पी देखकर राजकुमार बहुत गुस्साता है और उसको पकड़ कर कहता है |
आदित्य– अगर तुम ऐसे ही चुप रही ना तो मैं तुम्हे ऐसे सजा दूंगा जो ज़िन्दगी भर याद रखोगी |

..………..तो निवेदिता डर के अपनी सच्चाई बताती है

निवेदिता — मैं कोई निवेदिता नहीं हो मेरा नाम सायेली… है , और मैं धनपुर के राजा हरीशचंद्र की पुत्री हो |
……………….निवेदिता से ये सब सुनकर आदित्य बहुत गुस्साता है क्यूंकि मगद का धनपुर से बहुत पुरानी दुश्मनी रहती है और आदित्य ये समझता है की सायेली को उस हरिश्चंद्र ने अपना इरादा पूरा करने के लिए भेजा है लेकिन आदित्य ऐसा होने नहीं देता है वो सायेली की सच्चाई जाकर सबको बता देता है………और उसे महल से बाहर जाने को कहता है ,लेकिन सायेली रो रो कर कहती है की वो नही जाना चाहती है लेकिन आदित्य उसकी एक नही सुनता है और उसे खुद जाकर उसके महल छोडकर चला आता है |

———-सायेली का इस तरह से घर छोडकर भाग जाना उसके पिता को बिलकुल अच्छा नही लगता और वे उससे कड़ी से कड़ी सजा देते है और उसका खाना पीना बंद कर देते है और सायेली पूरी तरह से टूट जाती है |

…………………कुछ समय बाद आदित्य जंगलो में शिकार करने जाता है तो रस्ते में उससे एक लड़की दिखाई देती है और वो आदित्य को रोखती है आदित्य उससे पूछता है की ” तुम कौन हो” ?

लड़की-– मेरा नाम मीरा है और में राजकुमारी सायेली की सहेली हो |
आदित्य तो इससे मुझे क्या की तुम उसकी सहेली हो, हटो मेरे रस्ते है
मीरा — राजकुमार आदित्य सायेली को बचा लीजिये उसके पिता उसे ज़िदा ही मार डालेगे |
आदित्य – अच्छा उसके पिता..भला कोई पिता अपने ही बच्चो की हत्या क्यों करेगा …(आदित्य हँसता है )

मीरा -आपको को मेरी बात मजाक लग रही है लेकिन यही सच है …वो उसकी शादी ज़बरदस्ती अपने साथी के बेटे से करना चाहते है..
आदित्य — तो इससे मुझे क्या…..वो चाहे उसके साथ कुछ भी करे ….आखिर वो उसके पिता है..
मीरा (गुस्साते हुए ) -हाँ उसके पिता है वो लेकिन सोतेले पिता है …

………………..आदित्य ये ऐसा सुन कर हकड़ जाता है
आदित्य - क्या..क्या .कहा तुमने सोतेले पिता |
मीरा हाँ आदित्य सोतेले पिता और वो उसकी शादी इसलिए अपने साथी के बेटे से करवाना चाहता ताकि वो दोनों मिलकर आपके राज्य पर हमला कर सके |
आदित्य क्या….
मीरा और सायेली तो अपनी जान बचाने के लिए आपके महल आ गयी थी क्यूंकि वो जानती थी जब तक सायेली के शादी नही होती वे हरिश्चंद्र कुछ नही कर सकते , क्यूंकि जिससे सायेली की शादी होने वाली है .वो .राजा जगदीश का बेटा है और अपंग है…..और इसलिए राजा हरिश्चंद्र ऐसे सर्त रखी और राजा जगदीश को अपने बेटे के शादी के लिए ये सर्त माननी पड़ी और आपको हराने के लिए वो हरिश्चंद्र के तरफ हो गया |

…………………आदित्य ये सब सुन बहुत दु:खी होता है और अपने ऊपर.गुस्सा भी करता है क्यूंकि उसके वजय से ही..सायेली को दोबारा उस नरक में जाना पड़ा |
……………….लेकिन आदित्य उसी वक़्त फेसला लेता है की वो खुद धनपुर जाकर सायेली को बचायगा और साथ ही…उस हरिश्चंद्र को सबक सिखाएगा
वो महल पहुचकर ये सब सारी बात अपने पिता को बताता है और उसके बाद धनपुर जाने की पूरी तेयारी करता है ……|

राजा — पुत्र क्या तुम अकेले जाओगे…क्या सैनिको को नहीं ले जाओगे….
आदित्य–नही पिता जी …अगर मैं सैनिको को ले गया और गलती से हरिश्चंद्र ये खबर मिल गयी की हम उसके राज्य पर हमला करने जा रहे है तो हो सकता की वो धोखे से सैनिको यहाँ भेज दे और मेरे ना रहने पर हमारी प्रजा को नुस्कान पहुँचाये क्यूंकि हम सब जानते है की हरिश्चंद्र के पास सैनिको बहुत है , और हमारे सैनिक यहाँ रहेगे तो , हमारे राज्य को कोई नुक्सान नही होगा..|

राजा– ठीक है जैसा तुम्हे ठीक लगे मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है |

……………………….आदित्य अकेले ही सायेली के महल जाता है और चुपके से महल के अन्दर घुसता है और सायेली का कमरा खोजता और जब कमरा उसे मिल जाता है तो वे चुपके से उसके कमरे में घुस जाता है.. वहा पर अचानक सायेली जब आदित्य को देखती है तो उसे पहचान नही पाती और वो चिल्लाने ही जाती तब तक आदित्य उसका मुहँ बंद कर देता है, कुछ देर के लिए दोनों के दुसरे को देखने लगते है…तब सायेली उसे कसके धक्का देती और उससे कहती है |

सायेली आप यहाँ क्या कर रहे है |
आदित्य- तुमे यहाँ से ले जाने आया हो….
सायेली क्या….पर क्यों
आदित्य – क्यूंकि मेरा मन कर रहा है …
सायेली-आपका दिमाग सही है की नहीं ..

…….आदित्य उसके सवालो का जवाब नही देता है और उसके गर्दन पर तलवार रख कर कहता है
आदित्य अगर ज्यादा सवाल जवाब की तो यही…काट डालूगा |
.………………………सायेली बहुत डर जाती है ..और आदित्य उससे ज़बरदस्ती उसे उठा कर कमरे के खिड़की से ले जाता है …सायेली बहुत चिल्लाती है लेकिन वो उसके मुह पर पट्टी बाँध देता है….लेकिन तब तक सैनिक देख लेता है और उसे रोकता है लेकिन आदित्य सबको हटाते हुआ वहा से निकलने में सफल हो जाता है लेकिन हरिश्चंद्र को ये खबर मिलते ही वो मगद पर हमला करने का आदेश दे देता है ….और सायेली को लगता है की आदित्य उसे ज़बरदस्ती उठा के ले जा रहा है….पिता जी से बदला लेने के लिए….वो कुछ कर ही नही पाती और चिल्ला भी नही पाती है |

………………………….आदित्य अपने राज्य में प्रवेश करता है और अपने सारे सैनिको को आदेश देता है और युद्ध की घोषणा करता है……उधर से हरीश चन्द्र की पूरी सेना आती है और इधर से…मगद की सारी सेना तेयार रहती है और युद्ध का ये सर्त रहता है की जिसकी युद्ध में विजय होंगी वही सायेली को ले जा सकता है….युद्ध बहुत देर तक होता है और अंत में मगद राज्य की ही विजय होती और हरिश्चंद्र हार मानकर अपना राज्य आदित्य को सोंप देता है |

…………….युद्ध जीतने के बाद सायेली आदित्य के पास आती है और कहती है

सायेली-आपने ऐसा क्यूँ किया क्यों मुझे बचाया |
………………..आदित्य कुछ नही कहता है बस सायेली को देखता रहता है
सायेली-आप मेरे प्रशनों का उतर क्यों नही दे रहे है कहिये ना
आदित्य – क्यूंकि मैं अपनी राजकुमारी को खोना नही चाहता था |

सायेली क्या .क्या कहा आपने ?
आदित्य जो तुमने सुना

……वो दोनों एक दुसरे को देखने लगते है और अंत में आदित्य को एक सच्ची राजकुमारी मिल ही जाती है दोनों की बहुत धूमधाम से विवाह होता है….|

……... शालिनी शर्मा

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mohinder Kumar के द्वारा
June 14, 2012

शालिनी जी, सुखद अंत लिये एक अच्छी कहानी.

    shalini sharma के द्वारा
    June 17, 2012

    जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया……

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
June 12, 2012

बढ़िया कहानी शालिनी जी |

    shalini sharma के द्वारा
    June 12, 2012

    जी शुक्रिया….आपका…..

akraktale के द्वारा
June 12, 2012

सादर, ठेठ फ़िल्मी अंदाज में लिखी कहानी, हाँ शुरू से अंत तक पढने में मन जरूर लगा रहता है. लेखन कला सुन्दर है. बधाई.

    shalini sharma के द्वारा
    June 12, 2012

    ..जी हमारा लेख पढने के लिए शुक्रिया…..आपका….


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