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ज़िन्दगी के अनेक सफ़र ...

Posted On: 17 Apr, 2012 में

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अनजाने शहर में चला हो मैं |
न जाने किन वादियों में ,
मन में छोटे छोटे सपने लिए,
अनजाने शहर में चला हो मैं

खेला जहाँ गाव के हरियाली के नीचे ,
आज उसे छोड़ निकल पड़ा एक सफ़र में ,
मन में छोटे छोटे सपने लिए,
अनजाने शहर में चला हो मैं,
नींद ली जब मैं उस माँ के गोद में ,
उसके लुरियो की धुन आज कान में बजे ,
आज उससे भी छोड़ निकल पड़ा एक सफ़र में ,
मन में छोटे छोटे सपने लिए ,
अनजाने शहर में चला हो मैं ,

खाली हाथ के कलाई में जब बंधी बहिन की राखी,
तो आज सुनी पड़ी है हाथ की कलाई ,
आज उसे छोड़ निकल पड़ा एक सफ़र में ,
मन में छोटे छोटे सपने लिए,
अनजाने शहर में चला हो मैं,

जब होती लड़ाई तो साथ देते थे मेरे भाई,
तो आज अकेले पड़ रह गया हो मैं,
आज उसे छोड़ निकल पड़ा एक सफ़र में ,
मन में छोटे छोटे सपने लिए
अनजाने शहर में चला हो मैं,

यूही रह पर चलते चलते रह मंजिल मिल जायेगे |
.. दूर कही छूर पर ..रास्ते बिखर जायेगे ||
पर पास जाने पर एक नज़र आयेगे |
पर यूही रह पर चलते चलते मंजिल मिल जायेगे ||

मन में छोटे छोटे सपने लिए
अनजाने शहर में चला हो मैं ||

शालिनी शर्मा

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

April 19, 2012

जी, एक सफ़र मैं भी शुरू किया हूँ……. नंगो के नाच का. कृपया अवलोकन करना चाहें….. सही सवाल उठाया है आपने, आपकी बातों से शत प्रतिशत सहमत . कृपया विअश्य वृति को छोड़कर मेरा नंगा नाच देखने की कृपा करें…… http://merisada.jagranjunction.com/2012/04/15/%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A8-2/

    shalinisharma के द्वारा
    April 20, 2012

    जी शुक्रिया आपका…..

yogi sarswat के द्वारा
April 18, 2012

दूर कही छूर पर ..रास्ते बिखर जायेगे || पर पास जाने पर एक नज़र आयेगे | पर यूही रह पर चलते चलते मंजिल मिल जायेगे || मन में छोटे छोटे सपने लिए अनजाने शहर में चला हो मैं || बहुत खूब पंक्तियाँ ! बढ़िया अभिव्यक्ति !

mayankkumar के द्वारा
April 17, 2012

आपके इस सफर में कोई साथ हो ना हो पर विशिष्ट शब्दों ने आपका भरपूर साथ दिया है …….. रोचक मर्मस्पर्शी कविता ……… बधाई ………….


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