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H .I .V पीडितो से दुरी क्यूँ ........

Posted On: 23 Jan, 2012 में

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एड्स एक ऐसे घातक बीमारी है जो अन्दर ही अन्दर इंसानों को खा जाता है आज पुरे दुनिया में एड्स से कई व्यक्ति पीड़ित है एड्स से होने के कई कारन है ,,,
हाल ही में एक घटना हुई थी जिसमे एक सड़क हादसे में एक पूरा परिवार घम्भीर रूप से घायल हो गया था जब ……हॉस्पिटल में उनका इलाज हुआ और फिर जब ब्लड टेस्ट हुआ तो पाया गया की उनका H . I .V पोसिटिव है ऐसा खबर सुन कर दोनों पति पत्नी का क्या हाल होता होगा वो तो वही समझे गे लेकिन वे जिस गाव के रहने वाले थे उन गाव लोगो ने तो उनसे बात करना छोड़ दिया और उनके घर जाना बंद कर दिया आखिर ऐसा क्यों …इसलिए क्यूंकि उंने एड्स था ……..एड्स कोई छुआ-छूत की बीमारी तो नहीं है ये आन्तरिक कारण से फेलती है हम समाज में रहते है तो कैसे एड्स पीडितो को समाज से अलग कर सकते है…..आखिर ये बीमारी समाज में रहकर ही तो फेला है तो हमारा समाज उनसे घिर्ण कैसे कर सकता है …आप सब खुद सोचये जब हम सबको पता चलता है की वह व्यक्ति H .I .V पोसिटिव है तो हम इतना घबरा जाते है तो उस व्यक्ति को कैसा लगता होगा ..जिसे खुद ये बीमारी हुआ है ….

आज हॉस्पिटल में भी इसकी खिली उड़ती है –व्यक्ति संकोच के मारे अपने बीमारी के बारे में खुलकर कुछ नहीं कह पता है पर ऐसा क्यों ….क्यूंकि हमारा समाज खुद इस बीमारी को लेकर और इसके बारे में खुलकर बातें नहीं करता है ……लेकिन हमे ऐसा नहीं करना चाहिए हमे एड्स के प्रति लोगो को जागरूक करना चाहिए और …..हो सके….इससे रुकने का का प्रयाश करना चाहिए …… और हमे एड्स पीडितो का साथ देना चाहिए ताकि वे सब अपना इलाज करवा सके न की संकोच मन इस बीमारी से मरते रहे है ………………….

शालिनी शर्मा

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chandrakant banwar के द्वारा
February 3, 2012

शालिनी जी यह लेख आपकी जागरूकता का परिचायक है , एड्स के प्रति जागरूकता ही एड्स से बचाव है ! और जो इससे पीड़ित हैं उन्हें सहानुभूति की आवश्यकता है , वो फिर से जीवन जीना सीख लेंगे बस उन्हें कोई आत्म विश्वाश दिलाये ….. हम कोशिश जरुर करेंगे !

abodhbaalak के द्वारा
January 25, 2012

क्योनी हम अभी भी अपने आपको कितना भी विकास शील और …………, पर हम हैं अभी भी वही…………. सुन्दर ……….. ऐसे ही लिखती रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Amar Singh के द्वारा
January 23, 2012

दूरी का कारण है और वो है भय. एड्स की बिमारी को कुछ लोगो ने अपने स्वार्थ साधने मात्र के लिए होवा बना दिया है. जैसे कुछ वर्षो पहले जब एड्स की बिमारी सुनने में भी नहीं थी तब लोग कैंसर की बीमारी को सबसे अधिक भय जनक मानते थे. जो अब भी है किन्तु किसी भी समस्या से भय्बित होकर कोई लाभ नहीं अपितु हानि ही हानि है. कई लोग तो अनावश्यक रूप से ही जिन्हें कोई बेमारी भी नहीं है वह भी इससे डर में ही जीते है की कही उन्हें भी यह न हो जाए. इसी भय को कुछ लोग भुनाने में लगे है. अरबो खरबों का खेल खेला जाता है, इससे बचने की सुरक्षा उपकरणों में. और लोग भी किसी अनजान भय वश अज्ञानता के कारण उसका शिकार भी बनते है. http://singh.jagranjunction.com/2012/01/21/%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A3-%E0%A4%B9/

    shalinisharma के द्वारा
    January 25, 2012

    हाँ यह सही लेकिन डरने से कुछ नहीं है एड्स के प्रति लोगो को जागरूक करना बहुत ज़रूरी है……


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