Kalam Ki Awaaz Se.....

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मिलन की रात......

Posted On: 8 Nov, 2011 में

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आज भी अलंकृता के लिए वो दिन याद है जब उसने पहली बार आहान को बारिश में भीगते देखा था और उसे बारिश में भीगते उसे देखती ही रही ना जाने क्या उसमे बात थी की अलंकृता की नज़रे उससे हटी ही नहीं रही थी ……लेकिन थोड़ी देर बाद वह सपनो की दुनिया से बाहर आ गयी और उससे हकीकत का ज्ञान हो गया……और वो रोते मन से घर की ओर चल दी……

ओर अपने आप को कोसने लगी ओर कहती आखिर क्यूँ भगवान् ने उसे दिल दिया आखिर क्यूँ उसे प्यार का अहसास दिलाया जब उसके ज़िन्दगी प्यार पाना लिखा ही नहीं है वह इस सोच को लेकर रात बार सोचती रही ओर उदास मन से सो गयी |

वह दुसरे दिन सुबह उठती अपना घर का सारा काम करती ओर कॉलेज के लिए चल देती कॉलेज में वह पढाई क्र रही होती है की आचानक उसके पास कोई आता है….वह तनया रहती है जो कॉलेज की न्यू स्टुडेंट रहती है..
तनया—हे मैं तनया मैं नयी हो क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी
अलंकृता — क्या दोस्ती
तनया — हाँ क्यूँ…कोई परेसानी
अलंकृता — नहीं ठीक है आज से हम दोस्त ओ.के

इस तरह से तनया ओर अलंकृता में दोस्ती बढती गयी लेकिन फिर अलंकृता उस लड़के को नहीं भूल पा रही ओर उसे मिलना चाहती थी लेकिन उसे ना तो उसके घर का पता था ना ही उसे वो जानती थी..उसने ये बात तनया को बताया लेकी तनया हसने लगी लेकिन अलंकृता को उदास देखकर वह हँसना बंद कर दी और उससे पूरी बात पुछने लगी…इस तरह से दो महीने बीत गए लेकिन तब भी अलंकृता को उससे मिलने की आस थी…

एक दिन तनया ने अलंकृता को अपने घर बुलाया क्यूंकि तनया के घर खूब बड़ी पार्टी थी और अलंकृता उसके घर पहली बार गयी थी उसका घर बड़ा था पार्टी में सभी एन्जॉय क्र रहे थे की अचानक एक वेटर का ट्रे गलती से अलंकृता के ड्रेस पर गिर जाता है तनया ये सब देखती है तो वेटर के ऊपर बहुत गुस्साती है वह तभी अलंकृता को अपने कमरे ले जाती है और ड्रेस बदलने के लिए कहती है…थोड़ी देर बाद तनया किसी काम से बहार चली आती है…..तब तक निचे तनया का बड़ा भाई आता है….और उसे अचानक घर आते देखकर सब खुश होते है…तब उसका भाई तनया को पूछता है ….और वह उसके कमरे में जाता है और अलंकृता को तनया के ड्रेस में देखकर उसे तनया समझता है और उसकी ऑंखें बंद कर देता है वह घबरा जाती है और कुछ कह नहीं पाती है….तब तक पीछे से तनया अपने भाई सर पर मरती है और कहती है—-भाई ये मेरी दोस्त है ….अलंकृता
उसका भाई जल्दी से अपना हाथ हटाता है और सॉरी कहता है …..तब-तक पीछे मुडती है और उसके भाई को देखती है और उसे बस देखती ही रहती है क्यूंकि वो कोई और नहीं आहान रहता है तनया का भाई …..जिसे उसने बारिश में भीगते देखि थी……उसके देखकर अलंकृता को वो सारी यादें ताज़ा हो जाती है ….जिसने उसे अपने सपनो में देखा था……वह खुश तो थी लेकिन उदास भी क्यूंकि वह तनया का भाई था और वो उससे बताये भी तो कैसे बताये ………

धीरे-धीरे तनया और अलंकृता के घर आना जाना लगा…….एक उसने आहानं और तनया को अपने घर बुलाया और अलंकृता और आहान ने बहुत बातें की और अलंकृता धीरे -धीरे आहान से प्यार करने लगी थी और उसका प्यार वक़्त के साथ गहरा होता गया…..उसने अपनी सारी बातें एक ड़ेरी में लिखती थी जिसके बारे में तनया को कुछ भी नहीं पता था………

प्यार भी कैसे मोड़ लेता है जहा अलंकृता आहान से प्यार करती थी वही दूसरी तरफ आहान्न के दिल में अलंकृता के लिए कोई भी फीलिंग नही थी ………….एक आहान किसी काम के सिलसिले में अलंकृता के घर गया …..अलंकृता आहान को अचानक अपने घर में देखकर चोक जाती है ………
अलंकृता– आप यहाँ ….
आहान– हाँ वो में तनया ने मुझे इंग्लिश की की कॉपी लाने के लिए भेजा है
अलंकृता — ठीक आप यहाँ बैठिये में ला रही हो…….

अलंकृता का तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था………
आहान उसका घर देखने लगा उस वक़्त अलंकृता के घर में कोई नहीं था….वह उसका घर देखते – देखते उसके कमरे में चला जाता है……..

थोड़ी देर बाद अलंकृता आती है…..और आहान को कॉपी देती है और वो चला जाता है….उस वक़्त आहान अलंकृता को बड़े ध्यान से देखता है….

दो महीने बाद अलंकृता की शादी तय हो जाती……….और ये खबर पा क्र तनया बहुत गुस्सती है….और वो अलंकृता से मिलती है….और वो ये शादी क्यूँ कर रही है…..
अलंकृता– तो क्या करो …….मैं कब तक में उसका इत्नेज़ार करो
तनया— यर तुमने कभी उसके बारे में पता किया……
अलंकृता– अब कोई फायदा नही है…..रहने मैं भूल जयोगी |
तनया— ठीक है अलंकृता मैं तुम्हारे साथ ज़बरदस्ती नहीं करोगी………

अलंकृता के सागाई के वक़्त सिर्फ तनया आती है……..तनया उसके कमरे में जाती है…..और उसको सागाई के लिए ले जाती है……..उसका मन बिलकुल नहीं था सागाई करने का…..सागाई के वक़्त अलंकृता अंगूठी भूल जाती है और तनया उससे लेने जाती है…वह दराज में रखा रहता है तनया दराज खोलती है तो उसे अंगूठी के साथ साथ एक ड़ेरी…मिलता है……और वो उससे खोलकर पढ़ लेती और उससे पता चल जाता है…की अलंकृता…उसके भाई से प्यार करती है…और ये वही इंसान है…जिसे अलंकृता…ने हमेशा से चाह……वो बहुत गुस्सती है…….और वो नीचे जाकर उसकी सागाई रोकवा देती है…और अलंकृता को ज़बरदस्ती अपने घर ले जाती है…..और अपने भाई को उसकी ड़ेरी…दिखा देती है…..अलंकृता तभी उससे झूठ बोलती है….और आखिर वो बहार चली जाती है…..बाहर बहुत तेज बारिश होती है…….

तब तक पीछे से आवाज़ आती है…..वो पीछे मुडती है पीछे कोई और नहीं बल्कि आहान रहता है…….आहान्न उसका हाथ पडकर एक पेड़ नीचे ले जाता है……..और कहता है….
आहान— आखिर कब तक अलंकृता तुम झूठ बुलोगी मुझसे या फिर अपने आप से….
अलंकृता— झूठ……
आहान– हाँ झूठ……..यही की तुम मुझसे प्यार करती हो……
अलंकृता…और आहान एक दुसरे को देखने लगते है…..
आहान—-मुझे इस ड़ेरी के बारे में महीने से पता था……याद है जब मैं तुम्हारे घर आया था…कॉपी मांगने….और तुम्हारे कमरे में गया था…तभी मैंने ये ड़ेरी….पढ़ लिया…था…

अलंकृता….एक दम से खामोश हो जाती है….और कहती…..
अलंकृता—तब आपने बताया क्यूँ नहीं….
आहान– क्यूंकि मैं तुम्हारे पहल का इतेज़ार कर रहा था……और तुमने शादी…के लिए…हाँ कर दिया…..
अलंकृता——-मैं कुछ नहीं…

आहान उसके करीब आता है..और कहता है…….”मैं तुमसे प्यार करता हो…..जबसे मैंने तुमको….देखा तबसे…….”

अलंकृता के आँखों में आंसो आने लगते है और वह इन भीगी रात उसके गले मिल जाती है
………………………..सच ये मिलन उन दोनों की भीगी मिलन रहती है………….

शालिनी शर्मा

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Amar Singh के द्वारा
November 9, 2011

बहुत ही सार्थक लेख. ऐसे ही लिखती रहिये. शुभकामनाये. http://singh.jagranjunction.com

    shalini sharma के द्वारा
    November 10, 2011

    thanks …. ……………………………

abodhbaalak के द्वारा
November 9, 2011

अच्छी रचना शालिनी जी, प्रवाह में कहीं कहीं ………….., पर आपके मेहनत व्यर्थ नहीं गयी, अपने पात्रों के साथ आपने बड़ी सिंपल …………. ऐसे ही लिखती रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    shalini sharma के द्वारा
    November 10, 2011

    जी सुक्रिया आपका ……

raj के द्वारा
November 8, 2011

बड़ी सीधी पर मन में टीस उठाने वाली रचना भोली भाली सी लगी बधाई शालिनी

    shalini sharma के द्वारा
    November 10, 2011

    जी शुक्रिया मेरे लेख को पढने के लिए……….


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