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एक लड़का जाने क्यूँ .................

Posted On: 17 Oct, 2011 में

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एक लड़का है अनजाना सा,
न जाने क्या करता है ,
समुंद्र के किनारे पढता है ,
लेकिन न जाने क्यूँ ,
सुबह पांच बजे नहीं उठ पाता है |

एक लड़का है परेशान सा ,
न जाने क्या सोचता है ,
खुबसूरत शहर में रहता है ,
लेकिन ना जाने क्यूँ ,
सुबह पांच बजे नहीं उठ पाता है |

एक लड़का है आलसी सा,
जाने क्या आदत है ,
बिहारियों के बीच पला है,
लेकिन ना जाने क्यूँ ,
सुबह पांच बजे नहीं उठ पाता है |

एक लड़का है सुधरा सा ,
जाने क्या सपने है,
मेहनत करने में आगे है,
लेकिन ना जाने क्यूँ ,
सुबह पांच बजे नहीं उठ पाता था |

एक लड़का है जाने कैसा है ,
समझता तो है,
लेकिन ना जाने क्यूँ ,
सुबह पांच बजे नहीं उठ पाता है |

शालिनी शर्मा

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Abhishek Verma के द्वारा
October 17, 2013

न जाने कहाँ से आई … मुझे अपना दीवाना बनायीं … फिर पलक झपकाते नज़रों से ओझल हो गयी…. वो लड़का जो ५ बजे नहीं उठ पता था…… पता नहीं उस लड़के में ऐसी क्या जादू कर गयी … न चाह कर भी वो हर र्दिन अब ५ बजे हिन् उठता है….. इस उमीद में की शायद वो दिन जरुर आएगा … जब उसे उसकी दीवानगी का आगाज़ नजर आएगा….. और वो इस्सी इंतज़ार में वो अपनी जिंदगी व्यापित करेगा…..

    shalinisharma के द्वारा
    November 7, 2013

    अच्छी बात है आप ५ बजे उठने लगे…

Muraridan के द्वारा
November 1, 2011

“अनर्गल प्रलाप”

Rajkamal Sharma के द्वारा
October 17, 2011

आपकी बाते भी अजीब सी है कभी तो आप सहेलियों को दोस्त कहती है और यह भी नहीं बताया है अभी तक कि पांच बजे उठने वालों को क्या मिलता है ? अगर पता चल जाता तो कल से ही अपने नियत समय से चार घन्टे पहले (पांच बजे ) उठने का कष्ट करूँगा …… http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/10/17/“खुदा-का-खत”/ :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

    akraktale के द्वारा
    October 18, 2011

    शालिनी जी, आदरणीय राज कमल जी ने बिलकुल सही कहा है की पांच बजे क्यूँ उठना है? फिर अनजाने को आपने कैसे जाना की वह पांच बजे नहीं उठाता? फिर आपने किसी प्रांत विशेष को जोड़कर शायद उनका अपमान किया है.रचनाएं दिलों को जोड़ने वाली लिखें दिलों को तोड़ने के लिए राजनीती ही बहुत है. कृपया प्रतिक्रियाओं पर उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास करें.इससे प्रतिक्रया देने वाले का उत्साहवर्धन होता है. धन्यवाद.

    Shalini Sharma के द्वारा
    October 18, 2011

    मैंने किसी शहर के बार मे बुराई नहीं की है ये तो बस एक कविता है ,,,और रही बात पांच बजे सुबह उठने का वो तो सभी को उठना चाहिए क्यूंकि सुबह की जो किरण होती है वो शायद ८ बजे के उठने में ना हो और मेरे इस कविताकविता का ये मतलब नहीं था की मैंने किसी प्रान्त की या फिर किसी इंसान की जो सुबह पांच बजे नहीं नह उठते है उनकी बुराई की है ये तो सिर्फ एक कविता है मैंने राजनीती नहीं की और ना मैं करना चाहती हो और वैसे एक कविता को दिल से इतना नहीं लगाना चाहिए की वो राजनीती बन जाये ये कविता के काल्पनिक है किसी व्यति विशेष के बारे में नहीं है और ना ही किसी प्रान्त के बारे में वैसे दुनिया में समुन्द्र के किनारे कई शहर है…..और अगर आप लोगो को मेरे इस कविता से बुरा हो तो मुझे माफ़ कीजये …………

Amar Singh के द्वारा
October 17, 2011

बहुत अच्छी कविता. मैं भी ५ बजे नहीं उठता लेकिन गुरुपर्व की प्रभात फेरियो में जरूर ४ बजे उठ जाता हु चाहे १ महीने के लिए ही सही……

Syeds के द्वारा
October 17, 2011

शालिनी जी सुन्दर कविता… बधायी http://syeds.jagranjunction.com

vikasmehta के द्वारा
October 17, 2011

शालिनी जी नमस्कार आजकल हर लड़का एसा ही होता है लेकिन मई तो 5 बजे ही उठता हूँ …….लेकिन लडकियों के बारे में भी कुछ ख्याल है आपका ? vikasmehta.jagranjunction.com

    Shalini Sharma के द्वारा
    October 18, 2011

    जी लडकियों की बात है वो तो कहना मान भी है लेकिन लड़के जल्दी नहीं मानते …..

TAHIR KHAN के द्वारा
October 17, 2011

सराहनीय कविता………..शालिनी शर्मा जी…..

abodhbaalak के द्वारा
October 17, 2011

शालिनी जी एक अजब सी ……….. गज़ब कविता, तरह तरह के लड़के लेकिन बेचारे ……………. सारे के सारे ………. वैसे मई ५ बजे उठ जाता हूँ, सो आई एम डिफरेंट ……….. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Shalini Sharma के द्वारा
    October 18, 2011

    जी शुक्रया मेरे रचनाओं को पढने के लिए वैसे जरुरी नहीं है की सिर्फ लडको मे ये आदत होती है आज कल लडकिया भी सुबह नहीं उठ पाती है और वैसे जरुरी नहीं है की सुबह ५ बजे ही उठा जाये


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